नई दिल्ली। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। इस संबंध में कहा गया कि देश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शोध संस्थानों को केवल डिग्री प्रदान करने वाले केंद्र न रहकर ऐसे ज्ञान और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित होना होगा, जहां तैयार होने वाले विचार, अनुसंधान और नई प्रौद्योगिकियां सीधे समाज की आवश्यकताओं और चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करें।
इस अवसर पर कहा गया कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब शिक्षा व्यवस्था शोध, नवाचार, कौशल विकास और तकनीकी उत्कृष्टता पर आधारित होगी। छात्रों को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उच्च शिक्षा संस्थानों को उद्योग, स्टार्टअप, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों से जोड़ते हुए व्यावहारिक अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ा जाए तो भारत वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। इसके लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और समाज के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक होगा।