पत्रकारिता की ताकत एक बार फिर सामने आई है, जब एक 25 साल पुराने GPF गबन मामले में लंबे समय से लंबित न्याय की प्रक्रिया में बड़ा मोड़ आया है। अहम सत्ता समाचार पत्र और हर्फ़ों की ताकत समाचार पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित खबर का सीधा असर देखने को मिला, जिसके बाद विभाग ने गंभीरता दिखाते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए.

मामला वर्ष 2001 का है, जब विद्युत विभाग में कार्यरत रहे जूनियर इंजीनियर इंद्र पाल सिंह के सामान्य भविष्य निधि (GPF) से लगभग ढाई लाख रुपये कथित तौर पर फर्जी तरीके से निकाल लिए गए थे। आरोप है कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता डी.पी. सिंह, सहायक अभियंता एस.के. सिंह तथा कार्यालय सहायक मुनेश चौहान ने मिलीभगत कर इस गबन को अंजाम दिया.
नियमों के अनुसार GPF की राशि का भुगतान केवल चेक के माध्यम से किया जाना चाहिए, लेकिन रिकॉर्ड में इसे नकद भुगतान दिखाया गया, जिससे गंभीर वित्तीय अनियमितता उजागर हुई। जबकि इसी अवधि में अन्य कर्मचारियों को नियमों के तहत चेक द्वारा भुगतान किया गया था.
पीड़ित 80 वर्षीय सेवानिवृत्त इंजीनियर इंद्र पाल सिंह पिछले कई वर्षों से लगातार विभागीय अधिकारियों और कार्यालयों के चक्कर लगाकर न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान उन्होंने कई बार पत्राचार भी किया, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
हालांकि, मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद गबन की पुष्टि करते हुए एफआईआर दर्ज कराने तथा आरोपियों के सभी देयकों को रोकने के आदेश जारी किए.
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में शामिल कार्यालय सहायक मुनेश कुमार चौहान पहले भी वर्ष 2012 में पुलिस चार्जशीट के बाद जेल जा चुका है और वर्तमान में जमानत पर बाहर है। अब नई कार्रवाई के बाद मामला दोबारा कानूनी प्रक्रिया में तेजी पकड़ सकता है.
इस निर्णय से पीड़ित परिवार में राहत और उम्मीद की भावना देखी जा रही है। 25 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में अब न्याय मिलने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं.