गाजियाबाद में अवैध डग्गेमार वाहनों पर बड़ी शिकायत, प्रशासनिक मिलीभगत के आरोपों से हड़कंप

Date: 2026-05-21
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गाजियाबाद में अवैध डग्गेमार एवं धक्केमार वाहनों के संगठित संचालन को लेकर एक गंभीर जनहित शिकायत राज्य प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंची है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिना पंजीकरण, बिना फिटनेस प्रमाणपत्र, बिना परमिट और बिना बीमा के वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा और आम नागरिकों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

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शिकायतकर्ता प्रदीप शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव हेल्प एशियन फाउंडेशन द्वारा प्रमुख सचिव एवं परिवहन विभाग को भेजे गए विस्तृत पत्र में मोटर वाहन अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं जैसे 39, 56, 66, 146, 184, 192-A और 207 के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई वाहनों में ओवरलोडिंग, छत पर यात्रियों को बैठाना, खराब तकनीकी स्थिति और बिना लाइसेंस चालकों द्वारा संचालन जैसी गंभीर अनियमितताएं जारी हैं।

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शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि इस अवैध परिवहन व्यवस्था के पीछे प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत और भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे प्रवर्तन तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद कई वाहन पुनः सड़कों पर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं।

 

मामले पर परिवहन आयुक्त कार्यालय से जारी पत्र में उप परिवहन आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसमें फोटो साक्ष्यों के आधार पर वाहनों के पंजीकरण, फिटनेस, परमिट एवं बीमा की जांच तथा पूर्व में की गई प्रवर्तन कार्रवाइयों का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा गया है।

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इसी क्रम में आईजीआरएस प्रणाली के तहत प्राप्त आख्या में यातायात पुलिस ने बताया कि वर्ष 2025 से 2026 के बीच हजारों वाहनों पर ई-चालान एवं सीज की कार्रवाई की गई है। इनमें बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना बीमा, ओवरलोडिंग और दोषपूर्ण नंबर प्लेट जैसे उल्लंघन शामिल हैं।

 

हालांकि जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि लगाए गए सभी आरोप पूर्ण रूप से सिद्ध नहीं पाए गए, लेकिन अवैध परिवहन गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई जारी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अधिक सख्ती बरती जाए और नियमित प्रवर्तन सुनिश्चित किया जाए।

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यह पूरा मामला अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर समीक्षा के अधीन है, और आगे की कार्रवाई की निगरानी उच्च अधिकारियों द्वारा की जा रही है।

 

1779354876_6a6b5e89-5ab3-428d-909b-18242cf89e5d.jpgशिकायतकर्ता का स्पष्ट कहना है

कि नियमों और प्रावधानों को ताक पर रखकर जनता के जीवन और जनहित से जुड़ी समस्याओं की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका आरोप है कि IGRS के माध्यम से किए गए निस्तारण केवल औपचारिकता प्रतीत होते हैं, क्योंकि निस्तारण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी कारण शिकायतकर्ता अब मजबूरी में मा० सर्वोच्च न्यायालय एवं मा० उच्च न्यायालय का रुख करने पर लगभग बाध्य है, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और पारदर्शिता स्थापित हो सके।

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