नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत देशभर के करोड़ों गरीब परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए थे। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना था। योजना के शुरुआती वर्षों में इसे व्यापक समर्थन मिला और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिला.

हालांकि हाल के वर्षों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और सब्सिडी व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि गैस सिलेंडर की बढ़ती लागत गरीब परिवारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है.
आलोचकों का दावा है कि गैस सिलेंडर महंगा होने के कारण कुछ परिवारों ने सिलेंडर रिफिल कराना कम कर दिया है और वे फिर से लकड़ी, उपले या पारंपरिक चूल्हों का उपयोग करने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों परिवारों को स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली है और समय-समय पर राहत उपाय भी लागू किए गए हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ ईंधन की पहुंच के साथ-साथ उसकी वहनीयता (Affordability) भी महत्वपूर्ण है। यदि गरीब परिवार नियमित रूप से रिफिल नहीं करा पाते, तो योजना का अपेक्षित लाभ प्रभावित हो सकता है.
गैस कीमतों और सब्सिडी को लेकर जारी बहस के बीच यह मुद्दा आम जनता. राजनीतिक दलों और नीति निर्माताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.