देश में एक बार फिर मीडिया की स्वतंत्रता और राजनीतिक पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूज़र्स के बीच यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है कि कांग्रेस नेता Rahul Gandhi देश और विदेश में खुलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हैं, जबकि प्रधानमंत्री Narendra Modi पर विदेशी मीडिया से दूरी बनाए रखने और सीमित इंटरव्यू देने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण होती है और नेताओं को बिना स्क्रिप्ट के सवालों का सामना करना चाहिए। वहीं बीजेपी समर्थकों का तर्क है कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार जनता से संवाद करते हैं और कई बड़े इंटरव्यू व कार्यक्रमों के जरिए अपनी बात देश तक पहुंचाते हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूज़र्स इसे लोकतंत्र और मीडिया की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले मीडिया और प्रेस स्वतंत्रता का मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि बीजेपी इसे विपक्ष का राजनीतिक नैरेटिव बता रही .
फिलहाल यह मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है.