उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) में पिछले 10 दिनों से चल रहा आउटसोर्स कर्मचारियों का धरना बुधवार रात विवादों के बीच समाप्त हो गया. कर्मचारी लंबे समय से स्थायी नियुक्ति (Permanent Job) की मांग को लेकर अस्पताल परिसर में धरना दे रहे थे.
धरने पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि देर रात पुलिस बल मौके पर पहुंचा और उन्हें जबरन धरनास्थल से हटाया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज किया.जिससे कई कर्मचारियों को चोटें आईं। घटना के बाद कर्मचारियों में नाराजगी देखी गई और उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए.

हालांकि पुलिस प्रशासन ने लाठीचार्ज के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल परिसर में लगातार चल रहे धरने की वजह से मरीजों और चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ रहा था.कई बार प्रदर्शनकारियों से अस्पताल के बाहर निर्धारित स्थान पर धरना देने का अनुरोध किया गया था, लेकिन सहमति नहीं बनने के बाद उन्हें वहां से हटाया गया.
पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का लाठीचार्ज नहीं किया गया और पूरी प्रक्रिया कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए की गई.वहीं प्रदर्शनकारी कर्मचारी इस दावे से सहमत नहीं हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.
GIMS प्रदेश के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में से एक है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि चिकित्सा सेवाओं को सुचारू बनाए रखना प्राथमिकता है.दूसरी ओर कर्मचारी अपनी नौकरी की सुरक्षा और स्थायीकरण की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं.

फिलहाल मामले को लेकर पुलिस. अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। घटना के वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है.