सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में भारतीय इतिहास और शिक्षा प्रणाली को लेकर कई तरह के दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें मदरसा शिक्षा और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े व्यक्तित्वों को लेकर अलग-अलग बातें कही जा रही हैं.

इन दावों में यह कहा जा रहा है कि इंडिया गेट पर कुछ विशेष संदर्भ लिखे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि India Gate एक युद्ध स्मारक है, जहां प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में ब्रिटिश भारतीय सेना के शहीद सैनिकों के नाम अंकित हैं.
इसी तरह भारत के पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक A. P. J. Abdul Kalam को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि वे स्वतंत्रता सेनानी थे, जबकि ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार वे एक महान वैज्ञानिक और DRDO के प्रमुख रहे हैं तथा बाद में भारत के राष्ट्रपति बने.

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े Chandrashekhar Azad revolutionary activities और अन्य घटनाओं को लेकर भी कई बार सोशल मीडिया पर गलत या अधूरी जानकारी फैलाई जाती है। इतिहासकारों के अनुसार भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों की भूमिका स्पष्ट रूप से दर्ज है, जबकि अन्य दावों को लेकर अक्सर भ्रम फैलाया जाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इतिहास को सही संदर्भ और प्रमाणों के आधार पर ही समझना चाहिए, क्योंकि अधूरी या गलत जानकारी समाज में भ्रम पैदा कर सकती है.

फिलहाल यह पूरा विषय सोशल मीडिया बहस और फैक्ट-चेक चर्चा का हिस्सा बना हुआ है.