डासना तालाब पर NGT का बड़ा एक्शन, कथित अवैध खनन की संयुक्त जांच के आदेश

Date: 2026-07-13
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नई दिल्ली/गाजियाबाद। डासना स्थित सिद्धपीठ देवी मंदिर के सामने स्थित सार्वजनिक तालाब को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। इस बार मामला डी-सिल्टिंग की आड़ में कथित अवैध खनन के आरोपों से जुड़ा है। एनजीटी ने आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों की संयुक्त जांच समिति गठित कर दो माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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यह मामला वसीम राजा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य (ओए संख्या 390/2026) के रूप में एनजीटी के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि इसी तालाब के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और पुनर्जीवन से संबंधित अफसर अली बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य (ओए संख्या 30/2022) पहले से विचाराधीन है। अधिकरण ने दोनों मामलों को एक-दूसरे से संबंधित मानते हुए साथ में सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

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डी-सिल्टिंग की आड़ में अधिक खुदाई का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि तालाब में डी-सिल्टिंग के नाम पर निर्धारित सीमा से अधिक खुदाई की गई, जिससे कथित अवैध खनन की आशंका पैदा हुई। सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि नगर पंचायत डासना के अधिशासी अधिकारी ने 21 मई 2026 की रिपोर्ट में डी-सिल्टिंग कार्य पूर्ण होने की जानकारी दी थी, जबकि बाद में उपलब्ध कराए गए फोटो और अन्य दस्तावेजों में खुदाई जारी रहने का दावा किया गया।

चार एजेंसियों की संयुक्त जांच समिति गठित

एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति में शामिल हैं—

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)
  • उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB)
  • भू-विज्ञान एवं खनन निदेशालय
  • जिलाधिकारी, गाजियाबाद

समिति को निर्देश दिया गया है कि वह दो माह के भीतर स्थल का निरीक्षण कर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करे।

जांच पूरी होने तक दिए गए अहम निर्देश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने खनन निदेशालय को निर्देश दिया है कि जांच पूरी होने तक डासना तालाब में डी-सिल्टिंग के नाम पर किसी भी प्रकार का अवैध खनन नहीं होने दिया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

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अफसर अली की याचिका से जुड़ेगा नया मामला

गौरतलब है कि डासना तालाब के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और पुनर्जीवन को लेकर अफसर अली पिछले कई वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी याचिका पहले से एनजीटी में लंबित है। अब कथित अवैध खनन के आरोपों वाला नया मामला उसी याचिका के साथ जुड़ने से पूरे प्रकरण की व्यापक सुनवाई होगी।

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जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि डी-सिल्टिंग की आड़ में अवैध खनन के आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम निष्कर्ष संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा की जाने वाली आगामी सुनवाई के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में डासना तालाब से जुड़े इस मामले पर अब पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों, स्थानीय नागरिकों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।

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