डासना तालाब में कथित अवैध खनन पर NGT सख्त: दो माह तक खुदाई पर रोक, संयुक्त जांच समिति गठित

Date: 2026-07-17
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गाजियाबाद के डासना तालाब से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी ने कथित अवैध खनन के मामले को बेहद गंभीर मानते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। अब पूरे मामले की संयुक्त जांच होगी और जांच पूरी होने तक डी-सिल्टिंग के नाम पर किसी भी तरह की कथित खनन गतिविधि पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं आइए जानते हैं पूरी रिपोर्ट  डासना स्थित सिद्धपीठ देवी मंदिर के सामने खसरा संख्या 2076, 2077 और 2078 में स्थित सार्वजनिक तालाब. जहां डी-सिल्टिंग यानी गाद निकासी के नाम पर कथित अवैध खनन के आरोप लगे मामला जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण पहुंचा 

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तो एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए बड़ा फैसला सुनाया। प्रधान पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश भू-तत्व एवं खनिकर्म निदेशालय और जिलाधिकारी गाजियाबाद की संयुक्त जांच समिति गठित कर दी है। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी साथ ही जांच पूरी होने तक तालाब में किसी भी प्रकार की कथित अवैध खुदाई पर रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं यह आदेश 10 जुलाई 2026 को वसीम राजा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य, ओरिजिनल एप्लीकेशन संख्या 390/2026 में पारित किया गया। जिलाधिकारी गाजियाबाद को इस संयुक्त जांच समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है वार्ड-15 के सभासद और याचिकाकर्ता वसीम राजा का कहना है कि पहले से विचाराधीन इस तालाब में डी-सिल्टिंग की आड़ में लगभग 15 से 20 फीट तक मिट्टी निकालकर कथित अवैध खनन किया जा रहा था। स्थानीय लोगों

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 और जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतों के बाद अब एनजीटी ने दो माह के भीतर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। उन्हें उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और तालाब का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। हेल्प एशियन फाउंडेशन के राष्ट्रीय सचिव चौधरी अफसर का कहना है कि डासना तालाब के संरक्षण की लड़ाई पिछले चार वर्षों से एनजीटी में चल रही है उनका दावा है कि इस मामले में करोड़ों रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना भी लगाया जा चुका है, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई उनका आरोप है कि तालाब के चारों ओर बनाया गया ट्रैक भी निर्माण और कूड़े के मलबे से तैयार किया गया, जिसकी कई बार शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया हेल्प एशियन फाउंडेशन के राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप शर्मा का कहना है

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 कि संस्था पिछले कई वर्षों से जलाशयों और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चला रही है। उनका कहना है कि प्रशासन स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद मामला एनजीटी पहुंचा और अब संयुक्त जांच समिति पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करेगी। संस्था को उम्मीद है कि जांच के बाद पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी और डासना तालाब को सुरक्षित किया जाएगा। अब सबकी निगाहें संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं क्या दो महीने में सच सामने आएगा क्या कथित अवैध खनन के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? और क्या डासना तालाब को उसका वास्तविक स्वरूप वापस मिलेगा? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएंगे।

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