नई दिल्ली/गाजियाबाद, 14 जुलाई। डासना स्थित सिद्धपीठ देवी मंदिर के सामने खसरा संख्या 2076, 2077 एवं 2078 में स्थित सार्वजनिक तालाब में डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) की आड़ में कथित अवैध खनन के मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीरता से लेते हुए बड़ा आदेश पारित किया है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), उत्तर प्रदेश भू-तत्व एवं खनिकर्म निदेशालय तथा जिलाधिकारी गाजियाबाद की संयुक्त जांच समिति गठित कर दो माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं

। साथ ही जांच पूरी होने तक तालाब में डी-सिल्टिंग के नाम पर किसी भी प्रकार के कथित अवैध खनन पर रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी गाजियाबाद को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है। यह आदेश वसीम राजा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (ओरिजिनल एप्लीकेशन संख्या 390/2026) में 10 जुलाई 2026 को पारित किया गया।

वसीम राजा (सभासद, वार्ड-15, नगर पंचायत डासना) का बयान वार्ड-15 के सभासद एवं याचिकाकर्ता वसीम राजा ने कहा

कि डासना के इस तालाब का मामला पहले से ही एनजीटी में विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद डी-सिल्टिंग के नाम पर लगभग 15 से 20 फीट तक मिट्टी निकालकर कथित अवैध खनन किया जा रहा था। इसकी शिकायत लगातार स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो माह की अवधि में जांच के आदेश दिए हैं तथा संयुक्त जांच समिति गठित कर जिलाधिकारी गाजियाबाद को नोडल अधिकारी बनाया है।

उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी और तालाब का संरक्षण किया जाएगा
। चौधरी अफसर (राष्ट्रीय सचिव, हेल्प एशियन फाउंडेशन) का बयान

हेल्प एशियन फाउंडेशन के राष्ट्रीय सचिव चौधरी अफसर ने बताया कि डासना तालाब के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का मामला लगभग चार वर्षों से एनजीटी में विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि एम.ए. संख्या 48/2022 में तालाब की सफाई, सौंदर्यीकरण एवं जल निकासी से जुड़े मुद्दों पर लगातार सुनवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एनजीटी एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23.69 लाख रुपये तथा 2.45 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना भी लगाया जा चुका है, लेकिन आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि तालाब के चारों ओर बनाया गया ट्रैक भी निर्माण एवं कूड़े के मलबे से तैयार किया गया है, जिसकी कई बार शिकायत की गई, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। क्षेत्रीय लोगों, जनप्रतिनिधियों एवं संस्था द्वारा लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि विभाग स्वयं अपनी रिपोर्ट में डी-सिल्टिंग पूरी होने की बात कह चुका था, फिर भी उसी के नाम पर दोबारा खुदाई कर कथित अवैध खनन किया जा रहा था।
प्रदीप शर्मा (राष्ट्रीय महासचिव, हेल्प एशियन फाउंडेशन) का बयान हेल्प एशियन फाउंडेशन के राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप शर्मा ने कहा

कि संस्था पिछले लगभग पांच वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं जलाशयों को बचाने की मुहिम चला रही है। उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रकरण में उनके द्वारा भी उच्च अधिकारियों को कई बार शिकायतें भेजी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जब प्रशासन स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो वार्ड-15 के सभासद वसीम राजा को एनजीटी की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि अब एनजीटी द्वारा दो माह के लिए कथित खनन गतिविधियों पर रोक लगाते हुए संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगी। संस्था को विश्वास है कि जांच के बाद पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होगी तथा डासना तालाब का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रेस वार्ता आयोजित इस संबंध में गाजियाबाद स्थित उडुपी कृष्णा रेस्टोरेंट में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें समाजसेवी, हेल्प एशियन फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में पत्रकार बंधु उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने एनजीटी के आदेश, कथित अवैध खनन, प्रशासन की भूमिका तथा आगे की कार्रवाई को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे, जिनका वसीम राजा, चौधरी अफसर और प्रदीप शर्मा ने विस्तार से जवाब दिया। वक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल डासना तालाब का संरक्षण, पर्यावरण की रक्षा और न्यायिक आदेशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराना है।