उत्तर प्रदेश के दो चर्चित हत्याकांडों—सूर्य चौहान हत्याकांड (गाजियाबाद) और धनराज मौर्य हत्याकांड (बलरामपुर)—को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। दोनों मामलों में सरकार और प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की तुलना करते हुए कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या दोनों पीड़ित परिवारों के साथ समान व्यवहार किया गया.
गाजियाबाद के सूर्य चौहान हत्याकांड में सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता. सरकारी नौकरी.आवास और सुरक्षा संबंधी कई घोषणाएं की गई थीं. प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार से मुलाकात की थी और परिवार के एक सदस्य को नौकरी का नियुक्ति पत्र भी सौंपा गया था। मामले के मुख्य आरोपी के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी.
वहीं बलरामपुर के धनराज मौर्य हत्याकांड में प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, गिरफ्तारी और कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। प्रशासन ने परिवार को आर्थिक सहायता की पेशकश भी की थी.हालांकि परिवार द्वारा कुछ मांगों को लेकर असंतोष जताए जाने की खबरें सामने आई थीं.
सोशल मीडिया पर दोनों मामलों की तुलना करते हुए कई यूजर्स यह सवाल उठा रहे हैं कि एक मामले में अतिरिक्त सुविधाएं और सहायता उपलब्ध कराई गईं, जबकि दूसरे मामले में वैसी घोषणाएं नहीं की गईं। दूसरी ओर सरकार और प्रशासन का पक्ष यह रहा है कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां. कानूनी स्थिति और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं. इसलिए कार्रवाई भी उसी आधार पर तय की जाती है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट नीति होना जरूरी है, ताकि किसी भी पीड़ित परिवार को यह महसूस न हो कि उसके साथ भेदभाव हुआ है.वहीं विपक्षी दल और सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं.
फिलहाल दोनों मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोग पीड़ित परिवारों के लिए समान न्याय और समान सहायता नीति की मांग कर रहे हैं.