‘छात्रों की गूंज’ अभियान: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, युवाओं ने बदलाव की मांग की

Date: 2026-06-18
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नई दिल्ली। देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ती नाराजगी अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। ‘छात्रों की गूंज’ नामक अभियान के माध्यम से हजारों छात्र शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं.

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अभियान से जुड़े छात्रों का कहना है कि आज प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, विशेषकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET और अन्य बड़े एग्जाम्स के लिए कोचिंग पर होने वाला खर्च लाखों परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है.उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में प्रतिभा से अधिक आर्थिक संसाधनों का प्रभाव देखने को मिलता है.

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राजस्थान के कोटा सहित देशभर के कई कोचिंग हब में पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा. मानसिक दबाव और लगातार बढ़ती फीस ने युवाओं के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. छात्रों का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं. बल्कि युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना होना चाहिए.

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‘छात्रों की गूंज’ अभियान के समर्थकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जहां हर छात्र को अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिले और आर्थिक स्थिति उसके सपनों के बीच बाधा न बने. वे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता.सुलभता और समान अवसर की मांग कर रहे हैं.

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शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और कोचिंग संस्कृति के प्रभाव पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है.आने वाले समय में यह मुद्दा शिक्षा नीति और छात्र हितों से जुड़ी बहस का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है.

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